
Vyakaran Siddhanta Kaumudi (Set of 4 Volumes)
(Paperback)
Pt. Harekant Mishra,
Chaukhambha Orientalia (Publisher)
Ships within 2-4 days
Out Of Stock

(Paperback)
Pt. Harekant Mishra,
Chaukhambha Orientalia (Publisher)
Ships within 2-4 days
Out Of Stock
वैदिक काल में कागज तो था ही नहीं, लिखने की सामगà¥à¤°à¥€ का विकास नहीं हà¥à¤† था। इसी कारण वेदों को कणà¥à¤ सà¥à¤¥ रखना पड़ता था। कणà¥à¤ सà¥à¤¥à¥€à¤•रण पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में लोगों के उचà¥à¤šà¤¾à¤°à¤£ में à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨à¤¤à¤¾ आने लगी। सà¥à¤µà¤°à¥‹à¤‚ की विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨à¤¤à¤¾ को दूर करने के लिठकà¥à¤› नियमों का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ किया जाने लगा। बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¤£ गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥à¥‹à¤‚ में अनेक सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ पर वà¥à¤¯à¤¾à¤•रण की परिà¤à¤¾à¤·à¤¿à¤•शबà¥à¤¦à¤¾à¤µà¤²à¥€ के दरà¥à¤¶à¤¨ होते हैं। शतपथ बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¤£ में à¤à¤•वचन तथा बहà¥à¤µà¤šà¤¨ तथा छानà¥à¤¦à¥‹à¤—à¥à¤¯ उपनिषदॠमें सà¥à¤µà¤°, उषà¥à¤®, सà¥à¤ªà¤°à¥à¤¶ वरà¥à¤£ विà¤à¤¾à¤œà¤• संजà¥à¤žà¤¾à¤“ं का उलà¥à¤²à¥‡à¤– हà¥à¤† है। सामवेदसंहिता में महरà¥à¤·à¤¿à¤—ण मनà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में वà¥à¤¯à¤¾à¤•रण निरà¥à¤¦à¤¿à¤·à¥à¤Ÿ पदों का उलà¥à¤²à¥‡à¤– करके आराधà¥à¤¯ देवों की सà¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿ करते थे। वेदों में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ सà¥à¤µà¤°à¥‹à¤‚ के उचà¥à¤šà¤¾à¤°à¤£ के कारण ही वà¥à¤¯à¤¾à¤•रण का उदà¥à¤à¤µ हà¥à¤†à¥¤ अतः सरà¥à¤µà¤ªà¥à¤°à¤¥à¤® वैदिक वà¥à¤¯à¤¾à¤•रण के लिठपà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¾à¤–à¥à¤¯ की रचना हà¥à¤ˆà¥¤ पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤¿à¤¶à¤¾à¤–à¥à¤¯à¥‹à¤‚ में वेद की विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ शाखाओं से समà¥à¤¬à¤¦à¥à¤§ वà¥à¤¯à¤¾à¤•रण के नियम दिये गये हैं। इसमें वरà¥à¤£à¥‹à¤šà¥à¤šà¤¾à¤°à¤£ शिकà¥à¤·à¤¾, संहिता के पदपाठमें परिवरà¥à¤¤à¤¨, सनà¥à¤§à¤¿ विजà¥à¤žà¤¾à¤¨, सà¥à¤µà¤°à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤¨, पदों का विà¤à¤¾à¤œà¤¨, तथा सà¥à¤µà¤°à¤¸à¤‚चार आदि विषयों का विवेचन किया गया है। इस पà¥à¤°à¤•ार वà¥à¤¯à¤¾à¤•रण का पà¥à¤°à¤¥à¤® शà¥à¤°à¥‹à¤¤ वेदों से उपलबà¥à¤§ होता है। वà¥à¤¯à¤¾à¤•रण को वेदाङà¥à¤— कहा गया है। वेदों के छः अङà¥à¤— है- शिकà¥à¤·à¤¾, कलà¥à¤ª, छनà¥à¤¦, निरà¥à¤•à¥à¤¤, वà¥à¤¯à¤¾à¤•रण तथा जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤·à¥¤ इन सरà¥à¤µà¥‹ अङà¥à¤—ों में वà¥à¤¯à¤¾à¤•रण का पà¥à¤°à¤®à¥à¤– सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ है, जैसाकि कहा गया है
