सिदà¥à¤§à¤¾à¤¨à¥à¤¤à¤•ौमà¥à¤¦à¥€ पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨à¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤°à¥€ का यह पà¥à¤°à¤¥à¤® à¤à¤¾à¤— नवीन पाठà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤®à¤¾à¤¨à¥à¤¸à¤¾à¤° छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ की सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ के लिठलिखा गया है। सिदà¥à¤§à¤¾à¤¨à¥à¤¤à¤•ौमà¥à¤¦à¥€ पर यदà¥à¤¯à¤ªà¤¿ अनेक टीकाà¤à¤ सरà¥à¤µà¤¤à¥à¤° उपलबà¥à¤§ हैं, जो विशेषतः परीकà¥à¤·à¥‹à¤ªà¤¯à¥‹à¤—ी नहीं हैं। अतः छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ के हितारà¥à¤¥ पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤¤à¤¯à¤¾ शबà¥à¤¦à¤¸à¤¾à¤§à¥à¤¤à¥à¤µ कठिन सूतà¥à¤° à¤à¤µà¤‚ फकà¥à¤•िांशो का सरलारà¥à¤¥ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤ªà¤¦à¤¾à¤¨ किया गया है जिससे छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ को अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ के समय उसका मनन करने से गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ का आशय शीघà¥à¤° ही समठमें आजायेगा। छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ की सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾à¤“ं की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से अनà¥à¤¤ में परिशिषà¥à¤Ÿ पृथकॠदे दिया गया है, जिसमें वà¥à¤¯à¤¾à¤•रणों से समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¤¿à¤¤ तथा सिदà¥à¤§à¤¾à¤¨à¥à¤¤à¤•ौमà¥à¤¦à¥€ के आधार पर लघूतà¥à¤¤à¤°à¥€à¤¯ à¤à¤µà¤‚ अति लघूतà¥à¤¤à¤°à¥€à¤¯ पà¥à¤°à¤¶à¥à¤¨à¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤° दे दिठगठहैं, जिससे परीकà¥à¤·à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को बहà¥à¤¤ ही सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ होगी। हम अपने सहयोगी चौखमà¥à¤à¤¾ ओरियणà¥à¤Ÿà¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¤•ाशन दिलà¥à¤²à¥€ के वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤• शà¥à¤°à¥€ बृजपाल दास गà¥à¤ªà¥à¤¤ जी के सà¥à¤ªà¥à¤¤à¥à¤° शà¥à¤°à¥€ अजय कà¥à¤®à¤¾à¤° गà¥à¤ªà¥à¤¤ जी को हृदय से धनà¥à¤¯à¤µà¤¾à¤¦ देते हैं, जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने इसके लेखन तथा पà¥à¤°à¤•ाशन में काफी सहयोग पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किया है। समà¥à¤à¤µ है इस गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ में छपाई जनà¥à¤¯ कà¥à¤› तà¥à¤°à¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¤¾à¤ रह गई हों, उसे पाठक-गण इस दोष को कà¥à¤·à¤®à¥à¤¯ समà¤à¤¤à¥‡ हà¥à¤ सà¥à¤µà¤¯à¤‚ à¤à¥‚ल सà¥à¤§à¤¾à¤° करके अनà¥à¤—ृहीत करेंगे।