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Cover of Vo Tera Ghar Ye Mera Ghar

Vo Tera Ghar Ye Mera Ghar

(Hardcover)

Malti Joshi,

Kitabghar Prakashan (Publisher)

Published
2015
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वो तेरा घर, ये मेरा घर इस बंगले के गृह-प्रवेश पर मां-पिताजी दोनो आए थे । बंगले की भव्यता देखकर खुश भी बहुत हुए थे, पर माँ ने उसांस भरकर कहा था, 'सोचा था, कभी-कभार छुट्टियों में तुम लोग आकर रहोगे, पर अब यह महल छोड़कर तुम उस कुटिया में तो आने से रहे।' उन्होने कहा था, 'हम यहाँ भी कहाँ रह पाते है मां । नौकरी के चक्कर में रोज तो यहाँ से वहाँ भागते रहते हैं। यहाँ तो शायद पेंशन के बाद ही रह पाएंगे । मैं तो कहता हूँ आप लोग वह घर बेच दो । पैसे फिक्स डिपॉजिट में रख दो या लड़कियों को दे दो और ठाठ से यहाँ आकर रहो ।' 'न बेटे! मेरे जीते-जी तो वह मकान नहीं बिकेगा,' पिताजी ने दृढ़ता के साथ कहा था, 'हमने बड़े अरमानों से यह घर बनाया था । इसे लेकर बहुत सपने संजोए थे । अब वे सारे सपने हवा हो गए, यह बात और है।' [इसी संग्रह की कहानी 'साँझ की बेला, पंछी अकेला' से]

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