कथ सहतय जगत म मलत जश क नम कस परचय क महतज नह ह। दश और वदश म फल लख परशसक मलत ज क कहनय क न सरफ आसवद गरहण करत ह बलक उन कहनय क सथ अपन जनदग क तन-बन ठबनत ह। à¤à¤•दम घरल और सहज हन क बद ठमलत ज क कहनय बहत बड समजक सनदश दत ह। य कहनय ससकर क à¤à¤£à¤¡à¤° ह और परमपरओ क धवजवहक ह। à¤à¤°à¤¤à¤¯ परमपर और ससकत क सरकषण अथव नर सवतनतरत जस नर क परयग कय बन मलत ज क कहनय सहतय, à¤à¤°à¤¤à¤¯ परवरक परमपर, ससकर à¤à¤µ मतशकत क सममन क अनठदरशन करत ह। à¤à¤°à¤¤à¤¯ कटमब क अवधरण क सह सनदश मलत ज क कहनय म दषटगचर हत ह। इसलठमलत