
Shuddhi
(Hardback)
Vandana Yadav,
Vani Prakashan (Publisher)
Ships within 2-4 days
Out Of Stock

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"शà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ - उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ परिवार के मà¥à¤–िया शेर सिंह की मृतà¥à¤¯à¥ से होती है। पंडित जी के कहे अनà¥à¤¸à¤¾à¤° मृत वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की आतà¥à¤®à¤¾, शà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ तक घर में रहने वाली है। बस यहीं से शà¥à¤°à¥‚ होता है उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ का ताना-बाना... जहाठमृतक की पतà¥à¤¨à¥€ अपने पति की आतà¥à¤®à¤¾ के ज़रिये घर-परिवार के लोगों के बदलते वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° और यहाठतक कि अपनी औलाद के असली चेहरों को à¤à¥€ देख पाती है। पहली मौत के कà¥à¤› दिनों के à¤à¥€à¤¤à¤° ही बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤— के à¤à¤¾à¤ˆ की मौत से हालात इस तरह बदलते हैं कि दोनों à¤à¤¾à¤ˆà¤¯à¥‹à¤‚ के बेटों और शादीशà¥à¤¦à¤¾ पोतों के परिवार à¤à¥€ à¤à¤• छत के नीचे, à¤à¤•साथ रहने को मजबूर हो जाते हैं। दोनों बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤— à¤à¤¾à¤ˆà¤¯à¥‹à¤‚ की विवाहित बेटियाठऔर नातिन à¤à¥€ दà¥à¤ƒà¤– जताने पहà¥à¤à¤šà¤¤à¥€ हैं। इसी बीच हालात तब और पेचीदा हो जाते हैं जब घर के सबसे महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ बेटे की पतà¥à¤¨à¥€ और उसकी लिव-इन-पारà¥à¤Ÿà¤¨à¤° à¤à¥€ à¤à¤•साथ गाà¤à¤µ में पहà¥à¤à¤š जाती हैं। वे सà¤à¥€ रिशà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° जो कà¤à¥€ à¤à¤•साथ रहने को तरसते थे इस समय साथ रहते हà¥à¤ उनका रिशà¥à¤¤à¥‹à¤‚ से मोहà¤à¤‚ग, घर के बड़े बेटे-बहू का बदलता वà¥à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤°, ज़मीन-जायदाद और पैसे के लालच के बीच यà¥à¤µà¤¾à¤“ं की सोच के साथ करवट लेते रिशà¥à¤¤à¥‹à¤‚ के कारण घर में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤ लगातार बदल रही हैं। राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के सीमावरà¥à¤¤à¥€ शहर बीकानेर से सटे गाà¤à¤µ उदयरामसर में वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ के बिछोह के बाद मिल रही नयी पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ पीढ़ियाà¤, दà¥à¤ƒà¤– के समय को à¤à¥€ हà¤à¤¸à¤¤à¥‡-रोते हà¥à¤ à¤à¤•साथ बिताने का सà¥à¤– उठाती हैं। कम समय में ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ से ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ साथ रहने की इचà¥à¤›à¤¾ सबके à¤à¥€à¤¤à¤° होती है कि उसी समय सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ अचानक पलट जाती है। नये हालात में तेरह के बजाय साथ रहने वाले दिनों की संखà¥à¤¯à¤¾ लगातार बारी-बारी से बढ़ती रहती है। "
