सैनिक के बोरà¥à¤¡à¤° पर पोसà¥à¤Ÿà¤¿à¤‚ग जाते ही उसके परिवार को सपरेटेड फैमिली कà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ में शिफà¥à¤Ÿ कर दिया जाता है। जब से सेना का गठन हà¥à¤† है, यह वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ चली आ रही है। कैंटोनमेंट के à¤à¥€à¤¤à¤° इस अलग तरह की दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में कà¥à¤¸à¥à¤® अपने सैनिक पति की पोसà¥à¤Ÿà¤¿à¤‚ग के बाद रहने के लिठपहà¥à¤‚चती है। यहाठसब ओर उसके जैसी महिलाà¤à¤‚ अपने बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के साथ रह रही हैं। चौधरी विहार, यानी सपरेटेड फैमिली कà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤Ÿà¤°à¥à¤¸à¥¤ à¤à¤¸à¥‡ घर जो सैनिकों के नाम पर अलॉट तो किठजाते हैं मगर वहाठसैनिक नहीं रहते। दरअसल कहा जाठकि यहाठसैनिकों के जीवन की असली "हीरो" रहती हैं, तब सही होगा। यहाठरहने वाली महिलाà¤à¤‚ 'सिंगल मदर' की à¤à¥à¤®à¤¿à¤•ा में अनेक मोरà¥à¤šà¥‹à¤‚ पर बिलà¥à¤•à¥à¤² अकेले संघरà¥à¤·à¤°à¤¤ हैं। आबादी के बीच रहते हà¥à¤, अकेलेपन से जूà¤à¤¤à¥€ सैनिक पतà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के जीवन पर हिनà¥à¤¦à¥€ साहितà¥à¤¯ में पहली बार इस विषय की उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¥€ दरà¥à¤œ करवाता है, वनà¥à¤¦à¤¨à¤¾ यादव दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ रचित "कितने मोरà¥à¤š" उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥¤ समाज में रहने वाली, समाज से कटी हà¥à¤ˆ इन अदà¥à¤à¥à¤¤ जीवट वाली महिलाओं के जीवन संघरà¥à¤·à¥‹à¤‚, देश के लिठदिठगठतà¥à¤¯à¤¾à¤— और बलिदान का लेखा-जोखा है 'कितने मोरà¥à¤š' उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¥¤