à¤à¤• सदी का जीवन जीने वाला वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ कोई साधारण नहीं होता। वह साधारण चोले में असाधारणता के गà¥à¤£à¤¸à¥‚तà¥à¤°à¥‹à¤‚ से विà¤à¥‚षित होता है। 15 अगसà¥à¤¤, 1924 को रापà¥à¤¤à¥€ और गोरà¥à¤°à¤¾ नदियों के कछार में पैदा हà¥à¤ हिंदी के सबसे पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥‡, नà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥‡ और दà¥à¤²à¤¾à¤°à¥‡ लेखक रामदरश मिशà¥à¤° सौ की उमà¥à¤° पार कर 101 वें पायदान पर खड़े हैं। तमाम पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ारों से समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ रामदरश जी के जीवन, सà¥à¤µà¤à¤¾à¤µ और उतà¥à¤¤à¤° जीवन की गतिविधियों को सà¥à¤§à¥€ कवि ओम निशà¥à¤šà¤² ने नज़दीक से देखा और परखा है तथा इस संसà¥à¤®à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥‹à¤šà¤¨ को à¤à¤• ललित आखà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में बदल दिया है। यह थोड़े शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ और शबà¥à¤¦à¤šà¤¿à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ के ज़रिठरामदरश मिशà¥à¤° को जानने की à¤à¤• कà¥à¤‚जी है। अनेक विधाओं में रचना का संकलà¥à¤ª लिठरामदरश जी को उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने जहां à¤à¤• किसानी चेतना के कवि के रूप में पाया है जो अपने को 'अषाढ़ का पहला बादल' कहता है, वहीं अपने पà¥à¤°à¤¬à¤¿à¤¹à¤¾à¤ªà¤¨ को छिपाता नहीं; उसका मन मà¥à¤•à¥à¤¤à¤•-सा उनà¥à¤®à¥à¤•à¥à¤¤ और हीरक-सा सतेज और मूलà¥à¤¯à¤µà¤¾à¤¨ है। 'मैं आषाढ़ का पहला बादल' उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जानने-समà¤à¤¨à¥‡ का à¤à¤• आईना है।