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Cover of लिंगभेद पितृसत्ता और स्त्रीवाद

लिंगभेद पितृसत्ता और स्त्रीवाद

(Hardcover)

जगदीश्वर चतुर्वेदी, सुधा सिंह,

Academic Publication (Publisher)

Published
01-01-21
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हिंदी आलोचना में परंपरा और आधुनिकता पर खूब चर्चा हुई है लेकिन पितृसत्ता पर एकदम चर्चा नहीं हुई है परंपरा और आधुनिकता की बुनियाद है पितृसत्ता पिता सत्ता को चुनौती दिए बगैर परंपरा और आधुनिकता की बुनियाद नहीं बदल सकते हकीकत यह है हिंदी के अधिकार समीक्षकों में पिछले सप्ताह के प्रति आलोचनात्मक विवेक का अभाग है उल्लेखनीय है धर्मनिरपेक्ष आलोचना का परिपेक्ष मित्रता से टकराए उसकी मीमांसा के बगैर निर्मित करना संभव नहीं है आत्मीयता की पहली बड़ी वैचारिक लड़ाई पितृसत्ता और पुंसवादी विचारधारा से है आधुनिक काल या पहले के किसी भी काल की आलोचना शान संस्कृत इतिहास आदि का कोई भी विमर्श पितृसत्ता की अपेक्षा करके विकसित नहीं हुआ है पितृसत्ता सभी विचारधाराओं की दूरी है समाज में किस विचारधारा का वर्चस्व होगा यह इस बात से तय होगा कि आखिरकार पितृसत्ता के साथ किस तरह का संबंध है |

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