‘à¤à¤°à¤¤à¤¯ समजशसतर’, समजशसतरय नबध क सगरह ह। पठक क इन नबध क मधयम स उन समजक और à¤à¤¤à¤¹à¤¸à¤• परपरकषय स परचत करय गय ह, जनहन à¤à¤°à¤¤à¤¯ समजशसतर क सदधत, पदधतय और समजक परकरयओ क वकस क दशओ क नरधरण कय ह। समजक शकतय और à¤à¤¤à¤¹à¤¸à¤• सदरà¤, जञन और सदधत क चतन य अचतन ढग क कस परकर स परà¤à¤µà¤¤ करत ह, यह इन नबध क पढन स पठक क आà¤à¤¸ हग। इस पसतक क समगर क द à¤à¤— म वà¤à¤œà¤¤ कय गय ह। पहल à¤à¤— म सदधतक पकष स जड हठलख ह, ज à¤à¤°à¤¤à¤¯ समजशसतर क सदधतक वकस पर परकश डलत ह। दसर à¤à¤— म समजशसतरय वषय-वसत सबध à¤à¤°à¤¤à¤¯ अधययन स जड हठलख क सकलन कय गय ह। अनत म, वरतमन समय म समजशसतर म आठपरवरतन à¤à¤µ उनस उतपनन समसयओ पर वसतर स वचर वमरश कय गय ह। आश करत ह क यह पसतक à¤à¤°à¤¤à¤¯ समजशसतर क शकषक, वदयरथय और समनय पठक क लठउपयग सदध हग।