
गोदान (Godan)
(Paperback)
मà¥à¤‚शी पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤šà¤‚द (Munshi Premchand),
Nai Sadi Book House (Publisher)
Ships within 2-4 days
Out Of Stock

(Paperback)
मà¥à¤‚शी पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤šà¤‚द (Munshi Premchand),
Nai Sadi Book House (Publisher)
Ships within 2-4 days
Out Of Stock
मश परमचद न ज कछ ठलख ह, वह आम आदम क वयथ कथ ह, चह वह गरमण ह य शहर। गव क अवयवसथ, कसन क तडप, गरमण समज क वसगतय, अधवशवस, उतपडन और पड क सचच तसवर परसतत करत ह - गदन। मश परमचद क चर-परचत शल क जत-जगत उदहरण ह गदन, ज जमन स जड हककत क बनकब करत ह। वशव क सरवधक à¤à¤·à¤“ म अनवद हकर बकन क गरव कवल गदन क ह परपत ह। ‘गदन’ क सरवधक परमणक ससकरण à¤à¤• सपरण उपनयस।
