'यदधरत ह म' मर कवतओ क परथम सकलन ह। इसम समय-समय पर लख मर रचनठसममलत ह। आचरय रमचदर शकल न ‘कवत कय ह’ शरषक नबनध म कवत क ‘जवन क अनà¤à¤¤â€™ कह ह। कवत य शइर मर लठमहज रचन परकरय ह नह, बलक जवन क खटट-मठअनà¤à¤µ क दसतवज ह। जड और चतन सठढल ह इनम। रजमरर क जदग म जब ठà¤à¤¸ चज स र-ब-र हत ह ज मनषय हन क नत मà¤à¤¸ जवब तलब करत ह तब à¤à¤• नय कवत क जनम हत ह। आसपस क दनय मठलखन क लठउदवलत करत ह। परसतत सगरह क अधकश कवतठदख, सन और à¤à¤— हआ यथरथ ह। जवन क वà¤à¤¨à¤¨ पकष क सहज, सरल शबद म कहन क कशश क ह मन। -हमकर शयम