"चनदरधर शरम 'गलर' क जनम 7 जलई, 1883 क परन बसत, जयपर म हआ थ। उनक परख हमचल परदश क कगड कषतर म 'गलर' गव क नवस थ। लहज कवय, लखक दवर जड जन वल तखललस (उपनम) क जगह उनहन 'गलर' क ह 'गलर' कर लय। पत ‘पडत शवरम शसतर ज’ क महरज दवर रजस सममन परपत हआ थ, स परवर जयपर म बस गय। यह 'गलर ज' क जनम हआ। उनक मत ‘लकषम दव’ थ। वद, परण और ससकत क जञन उनह घर स ह मलन शर ह गय थ। अत: 10 वरष क तरण आय म ह वह à¤à¤·à¤£ दन लग थ। उनहन पल, परकत, बरज, अवध, मरठ, गजरत, रजसथन, पजब, बगल, हनद, अगरज, फरच और अपà¤à¤°à¤¶ à¤à¤· क सथ ह सथ कई वदश à¤à¤·à¤“ क ठजञन अरजत कय। व आधनक हनद सहतय क परकश सतठकह जत ह। वह ‘दववद यग’ क महन सहतयकर क रप म उनक पहचन ह। सखमय जवन, बदध क कट और उसन कह थ, हनद सहतय जगत क अमर कतय ह। उसन कह थ, त गलर ज क परयय ह बन चक ह। परचन इतहस और परततव उनक परय वषय थ। उनक गहर रच à¤à¤· वजञन म थ। उनक वदवतत क ह परमण और परà¤à¤µ थ क 1904 स 1922 तक उनहन अनक महततवपरण ससथन म अधयपन करय कय और इतहस म 'दवकर' क उपध स सममनत हà¤à¥¤ प. मदन महन मलवय क आगरह पर 11 फरवर, 1922 क कश हनद वशववदयलय क परचय वà¤à¤— क परचरय पद क सशà¤à¤¤ कय। गलर ज क सजनशलत क चर मखय पडव ह — समलचक; मरयद; परतà¤; और नगर परचरण पतरक। इनक मधयम स गलर ज क रचनकर वयकततव उà¤à¤°à¤•र समन आय।"