सचà¥à¤šà¥€ रामायण ई.वी. रामासामी नायकर 'पेरियार' की बहà¥à¤šà¤°à¥à¤šà¤¿à¤¤ और सबसे विवादसà¥à¤ªà¤¦ कृति रही है। पेरियार रामायण को à¤à¤• राजनीतिक गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥ मानते थे। उनका कहना था कि इसे दकà¥à¤·à¤¿à¤£à¤µà¤¾à¤¸à¥€ अनारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ पर उतà¥à¤¤à¤° के आरà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की विजय और पà¥à¤°à¤à¥à¤¤à¥à¤µ को जायज़ ठहराने के लिठलिखा गया और यह ग़ैर-बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¤£à¥‹à¤‚ पर बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¤£à¥‹à¤‚ और महिलाओं पर पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ के वरà¥à¤šà¤¸à¥à¤µ का उपकरण है। रामायण की मूल अनà¥à¤¤à¤°à¥à¤µà¤¸à¥à¤¤à¥ को उजागर करने के लिठपेरियार ने 'वालà¥à¤®à¥€à¤•ि रामायण' के अनà¥à¤µà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ सहित; अनà¥à¤¯ राम कथाओं, जैसे—'कंब रामायण', 'तà¥à¤²à¤¸à¥€à¤¦à¤¾à¤¸ की रामायण' (रामचरित मानस), 'बौदà¥à¤§ रामायण', 'जैन रामायण' आदि के अनà¥à¤µà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ तथा उनसे समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¤¿à¤¤ गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥à¥‹à¤‚ का चालीस वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ तक अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ किया और 'रामायण पादीरंगल' (रामायण के पातà¥à¤°) में उसका निचोड़ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ किया। यह पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• 1944 में तमिल à¤à¤¾à¤·à¤¾ में पà¥à¤°à¤•ाशित हà¥à¤ˆà¥¤ इसका अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¤¼à¥€ 'द रामायण: अपन टà¥à¤°à¥‚ रीडिंग' नाम से 1959 में पà¥à¤°à¤•ाशित हà¥à¤†à¥¤ यह किताब हिनà¥à¤¦à¥€ में 1968 में 'सचà¥à¤šà¥€ रामायण' नाम से पà¥à¤°à¤•ाशित हà¥à¤ˆ थी धरà¥à¤®, ईशà¥à¤µà¤° और मानव समाज का à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ उनके दारà¥à¤¶à¤¨à¤¿à¤• चिनà¥à¤¤à¤¨ का केनà¥à¤¦à¥à¤°à¥€à¤¯ पहलू रहा है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने मानव समाज के सनà¥à¤¦à¤°à¥à¤ में धरà¥à¤® और ईशà¥à¤µà¤° की à¤à¥‚मिका पर गहन चिनà¥à¤¤à¤¨-मनन किया है। इस चिनà¥à¤¤à¤¨-मनन के निषà¥à¤•रà¥à¤·à¥‹à¤‚ को इस किताब के विविध लेखों में पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ किया गया है। ये लेख पेरियार के दारà¥à¤¶à¤¨à¤¿à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ के विविध आयामों को पाठकों के सामने रखते हैं। इनको पढ़ते हà¥à¤ कोई à¤à¥€ सहज ही समठसकता है कि पेरियार जैसे दारà¥à¤¶à¤¨à¤¿à¤•-चिनà¥à¤¤à¤• को महज नासà¥à¤¤à¤¿à¤• कहना उनके गहन और बहà¥à¤†à¤¯à¤¾à¤®à¥€ चिनà¥à¤¤à¤¨ को नकारना है। यह किताब दो खंडों में विà¤à¤¾à¤œà¤¿à¤¤ है। पहले हिसà¥à¤¸à¥‡ में समाहित वी. गीता और बà¥à¤°à¤œà¤°à¤‚जन मणि के लेख पेरियार के चिनà¥à¤¤à¤¨ के विविध आयामों को पाठकों सामने पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ करते हैं।