
Professor Ki Diary by Dr. Laxman Yadav | पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¸à¤° की डायरी - डॉ. लकà¥à¤·à¥à¤®à¤£ यादव
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Dr. Laxman Yadav,
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Professor Ki Diary by Dr. Laxman Yadav | परफसर क डयर - ड. लकषमण यदव यह कतब डयर, नटस और टपपणय क शल म अपन समय क तफतश करत ह। इसम समज और रजनत क बड परघटनठह त इसक बच बनत हठà¤à¤• परबदध नजवन क कहन ठह। यह आजमगढ क पछड कसन परवर म पद हत ह। इलहबद और दलल वशववदयलय स पढय करत ह। दशक à¤à¤° स जयद दलल क à¤à¤• कलज म अधयपन करत ह। उसक कध पर गरब परवर क अपकषओ और अपन सपन क वजन ह। वह अकल ह। वह असमजस, असरकष और अनशचतत स घर हआ ह। वह डर हआ ह। मगर वह कतब क नकर पन क जरय नह बनत, उनस अपन समज क समà¤à¤¨ क नजरय हसल करत ह। सततठउस डरत ह त वह डरन क बजय दससहस हत जत ह। धर-धर उसक समà¤, दयतवबध और लकपरयत क दयर बढत जत ह। वह कलस क छतर स सदर गरमण लग तक क परफसर बन जत ह। यह फकशनल ह, कयक इसम सजञठबदल द गय ह. यह ननफकशन ह, कयक शकषणक ससथन क सथत, समजक-रजनतक परसथतय रतत-रतत सह ह। इसम इसम कथ, सवद और सटयर ह त वकतत और वशलषण क चमक à¤à¥¤ इसम वह सब ह, ज à¤à¤• पठनय कतब म हन चहà¤à¥¤
