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Cover of Professor Ki Diary by Dr. Laxman Yadav | प्रोफेसर की डायरी - डॉ. लक्ष्मण यादव

Professor Ki Diary by Dr. Laxman Yadav | प्रोफेसर की डायरी - डॉ. लक्ष्मण यादव

(Paperback)

Dr. Laxman Yadav,

Unbound Script (Publisher)

Published
2024
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Professor Ki Diary by Dr. Laxman Yadav | परफसर क डयर - ड. लकषमण यदव यह कतब डयर, नटस और टपपणय क शल म अपन समय क तफतश करत ह। इसम समज और रजनत क बड परघटनए ह त इसक बच बनत हए एक परबदध नजवन क कहन भ ह। यह आजमगढ क पछड कसन परवर म पद हत ह। इलहबद और दलल वशववदयलय स पढय करत ह। दशक भर स जयद दलल क एक कलज म अधयपन करत ह। उसक कध पर गरब परवर क अपकषओ और अपन सपन क वजन ह। वह अकल ह। वह असमजस, असरकष और अनशचतत स घर हआ ह। वह डर हआ ह। मगर वह कतब क नकर पन क जरय नह बनत, उनस अपन समज क समझन क नजरय हसल करत ह। सततए उस डरत ह त वह डरन क बजय दससहस हत जत ह। धर-धर उसक समझ, दयतवबध और लकपरयत क दयर बढत जत ह। वह कलस क छतर स सदर गरमण लग तक क परफसर बन जत ह। यह फकशनल ह, कयक इसम सजञए बदल द गय ह. यह ननफकशन ह, कयक शकषणक ससथन क सथत, समजक-रजनतक परसथतय रतत-रतत सह ह। इसम इसम कथ, सवद और सटयर ह त वकतत और वशलषण क चमक भ। इसम वह सब ह, ज एक पठनय कतब म हन चहए।

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