सहतय अकदम परसकर स परसकत नसर शरम ज क परसकत उपनयस "परजत" ‘परजत’ कवल à¤à¤• वकष, कथ और वशवस मतर नह ह, बलक यथरथ क धरत पर लख à¤à¤• à¤à¤¸ तमनन ह, ज रहन क खन म रश-रश बनकर उतर ह और रह क शवस म खवब बनकर घल गई ह। उपनयस म ‘परजत’ à¤à¤• रपक नह, वह दरअसल नà¤-परन रशत क दसतन ह। उपनयस क कथवसत म इतहस कह करदर बनकर उà¤à¤°à¤¤ ह त कह वरतमन और अतत क बच सतरधर क à¤à¤®à¤• नà¤à¤¤ नजर आत ह। उसक इस आवजह म उपनयस क पतर कठतरख स गरज नजर आत ह त कठउसक तलश करत हठखद अपन खज म लग जत ह। उनक इस कशश म बहत-स सदरà¤, शखसयत, घटनठचह-अनचह अपन आकर गरहण कर लत ह और समय वशष पर पड धल क अपन उपसथत स खरज कर à¤à¤• नई समत क तरफ ल जत ह, जह पर दनयव à¤à¤—-दड क बच रशत क बहल क जददजहद अपन सर खबसरत और ऊरज क सथ मजद ह। कह ज सकत ह क नसर शरम क यह उपनयस उनक अठतक क सजनतमकत क नचड ह, जसम उनक वचर, बयन, à¤à¤·, सवदन और सरकर बहत सजद और धरदर बनकर उà¤à¤° ह। कससगई क परन फन उनह बखब आत ह। अलफ-लल क दसतग शहरजद क तरह लखक इनसन सवदनओ क तहखन, रशत क गलयर और दशकल क पचद रसत स गजरत हई पठक क उन चरतर क मन क गहर थह लन म न कवल मददगर सबत हत ह, बलक कसस क अत तक पहचत-पहचत यह रचन उनक दल म रशत क अहमयत क जजब ठउà¤à¤°à¤¤ ह। समय क इस दर म ‘परजत’ उपनयस क पढन à¤à¤• उपलबध ह मन जà¤à¤—।