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Cover of Paarijat (Paperback)

Paarijat (Paperback)

(Paperback)

Nasira Sharma,

Kitabghar Prakashan (Publisher)

Published
2017
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सहतय अकदम परसकर स परसकत नसर शरम ज क परसकत उपनयस "परजत" ‘परजत’ कवल एक वकष, कथ और वशवस मतर नह ह, बलक यथरथ क धरत पर लख एक ऐस तमनन ह, ज रहन क खन म रश-रश बनकर उतर ह और रह क शवस म खवब बनकर घल गई ह। उपनयस म ‘परजत’ एक रपक नह, वह दरअसल नए-परन रशत क दसतन ह। उपनयस क कथवसत म इतहस कह करदर बनकर उभरत ह त कह वरतमन और अतत क बच सतरधर क भमक नभत नजर आत ह। उसक इस आवजह म उपनयस क पतर कभ तरख स गरज नजर आत ह त कभ उसक तलश करत हए खद अपन खज म लग जत ह। उनक इस कशश म बहत-स सदरभ, शखसयत, घटनए चह-अनचह अपन आकर गरहण कर लत ह और समय वशष पर पड धल क अपन उपसथत स खरज कर एक नई समत क तरफ ल जत ह, जह पर दनयव भग-दड क बच रशत क बहल क जददजहद अपन सर खबसरत और ऊरज क सथ मजद ह। कह ज सकत ह क नसर शरम क यह उपनयस उनक अभ तक क सजनतमकत क नचड ह, जसम उनक वचर, बयन, भष, सवदन और सरकर बहत सजद और धरदर बनकर उभर ह। कससगई क परन फन उनह बखब आत ह। अलफ-लल क दसतग शहरजद क तरह लखक इनसन सवदनओ क तहखन, रशत क गलयर और दशकल क पचद रसत स गजरत हई पठक क उन चरतर क मन क गहर थह लन म न कवल मददगर सबत हत ह, बलक कसस क अत तक पहचत-पहचत यह रचन उनक दल म रशत क अहमयत क जजब भ उभरत ह। समय क इस दर म ‘परजत’ उपनयस क पढन एक उपलबध ह मन जएग।

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