"जिन धारà¥à¤®à¤¿à¤• घटनाओं ने बà¥à¤°à¤œà¤à¤¾à¤·à¤¾ के सफलतापूरà¥à¤£ उà¤à¤¾à¤° में सहायता की वे मोटे तौर पर à¤à¤• राजनीतिक पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से मेल खाती थीं। जैसे शहंशाह अकबर के लमà¥à¤¬à¥‡ शासनकाल के दौरान मà¥à¤—़ल शासन को मिलने वाली मज़बूती। अकबर की आरमà¥à¤à¤¿à¤• राजधानी फ़तेहपà¥à¤° सीकरी और उससे लगा हà¥à¤† मà¥à¤—़ल केनà¥à¤¦à¥à¤° आगरा पवितà¥à¤° हिनà¥à¤¦à¥‚ सà¥à¤¥à¤²à¥‹à¤‚ वृनà¥à¤¦à¤¾à¤µà¤¨ और मथà¥à¤°à¤¾ के क़रीब सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ था, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤• साथ बà¥à¤°à¤œà¤®à¤£à¥à¤¡à¤² कहा जाता है, जो उà¤à¤°à¤¤à¥‡ हà¥à¤ à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ आनà¥à¤¦à¥‹à¤²à¤¨ का गढ़ था। जिन राजपूत राजाओं को हाल ही में मà¥à¤—़ल वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ में शामिल किया गया था, जिनमें केशवदास के आशà¥à¤°à¤¯à¤¦à¤¾à¤¤à¤¾ ओरछा के बीर सिंह देव बà¥à¤¨à¥à¤¦à¥‡à¤²à¤¾, या आमेर के मानसिंह कछवाहा शामिल थे, ये बà¥à¤°à¤œà¤®à¤£à¥à¤¡à¤² में मनà¥à¤¦à¤¿à¤°à¥‹à¤‚ के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– पà¥à¤°à¤¾à¤¯à¥‹à¤œà¤• थे। वैषà¥à¤£à¤µ समà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ को जारी किये गये अकबर के फ़रमानों ने à¤à¥€ इस कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° की सांसà¥à¤•ृतिक पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ा को बढ़ाया। इस वैषà¥à¤£à¤µ उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ और बà¥à¤°à¤œ में राजपूत और मà¥à¤—़ल आशà¥à¤°à¤¯ के मेल ने à¤à¤¸à¤¾ परिवेश रचा जिसने इस कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° की à¤à¤¾à¤·à¤¾ में à¤à¤• नयी रà¥à¤šà¤¿ को विकसित किया। à¤à¤²à¥‡ ही इसके नाम से यह संकेत मिलता हो कि इसकी उतà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿ हिनà¥à¤¦à¥‚ समà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ में हà¥à¤ˆ, बà¥à¤°à¤œà¤à¤¾à¤·à¤¾ आरमà¥à¤ से ही बहà¥à¤®à¥à¤–ी कावà¥à¤¯ à¤à¤¾à¤·à¤¾ थी जिसने कई समà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ को आकरà¥à¤·à¤¿à¤¤ किया। जैसे वैषà¥à¤£à¤µà¥‹à¤‚ ने à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤•विता के लिठबà¥à¤°à¤œà¤à¤¾à¤·à¤¾ का उपयोग किया, वैसे ही अकबर के काल से यह à¤à¤•ाà¤à¤• और बहà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ा के साथ पà¥à¤°à¤®à¥à¤– दरबारी à¤à¤¾à¤·à¤¾ बन गयी। इसी बà¥à¤°à¤œà¤à¤¾à¤·à¤¾ में, और विशेषकर दरबारी परिवेश में रचे गये साहितà¥à¤¯ को, इतिहास लेखन की आम सहमति के साथ आधà¥à¤¨à¤¿à¤• काल में जाकर रीति साहितà¥à¤¯ कहा गया। —à¤à¤²à¤¿à¤¸à¤¨ बà¥à¤¶, इसी पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• से ★★★ वैषà¥à¤£à¤µ सांसà¥à¤•ृतिक सनà¥à¤¦à¤°à¥à¤ में उà¤à¤°à¥€ बà¥à¤°à¤œà¤à¤¾à¤·à¤¾ को केशवदास आदि रीति कवियों ने à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• चरित कावà¥à¤¯, दरबारी महाकावà¥à¤¯, छनà¥à¤¦, अलंकार और रस शासà¥à¤¤à¥à¤°, कवि-वंश लेखन, राज-वंशावली, राजपà¥à¤°à¤¶à¤¸à¥à¤¤à¤¿, à¤à¤µà¥à¤¯ और सचितà¥à¤° पाणà¥à¤¡à¥à¤²à¤¿à¤ªà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚, हिनà¥à¤¦à¥à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤¨à¥€ संगीत, नगर वरà¥à¤£à¤¨ व तीरà¥à¤¥à¤¾à¤Ÿà¤¨, योग साधना, आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ व यà¥à¤¦à¥à¤§à¤¨à¥€à¤¤à¤¿ के सैकड़ों गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥à¥‹à¤‚ की à¤à¤¾à¤·à¤¾ बनाया। सोलहवीं सदी से उनà¥à¤¨à¥€à¤¸à¤µà¥€à¤‚ सदी तक बà¥à¤°à¤œà¤à¤¾à¤·à¤¾ राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ से लेकर असम और हिमाचल से लेकर दकà¥à¤•न तक के à¤à¥‚à¤à¤¾à¤— में उचà¥à¤š अà¤à¤¿à¤°à¥à¤šà¤¿ के कावà¥à¤¯ और अà¤à¤¿à¤µà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की à¤à¤¾à¤·à¤¾ बन गयी थी। शैलà¥à¤¡à¤¨ पॉलक के शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ में कहें तो यह à¤à¤• ‘कॉसà¥à¤®à¥‹à¤ªà¥‰à¤²à¤¿à¤Ÿà¤¨ वरà¥à¤¨à¤¾à¤•à¥à¤¯à¥‚लर' या सारà¥à¤µà¤¦à¥‡à¤¶à¤¿à¤• देशà¤à¤¾à¤·à¤¾ बन चà¥à¤•ी थी। दà¥à¤°à¥à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ से आधà¥à¤¨à¤¿à¤• काल में बà¥à¤°à¤œà¤à¤¾à¤·à¤¾ को हिनà¥à¤¦à¥€ की à¤à¤• 'बोली' बता दिया गया और इसका अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ उन हिनà¥à¤¦à¥€ विà¤à¤¾à¤—ों में सीमित रह गया जिनके अपने संकà¥à¤šà¤¿à¤¤ मानदणà¥à¤¡ थे। इसका पà¥à¤¨à¤°à¥à¤®à¥‚लà¥à¤¯à¤¾à¤‚कन किये बिना à¤à¤¾à¤°à¤¤ में इतिहास लेखन की परमà¥à¤ªà¤°à¤¾à¤“ं को समà¤à¤¾ नहीं जा सकता और à¤à¤¾à¤°à¤¤ में 'इतिहास न होने' के हेगेलियन और जेमà¥à¤¸ मिलà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤¨ पूरà¥à¤µà¤¾à¤—à¥à¤°à¤¹à¥‹à¤‚ को तोड़ा नहीं जा सकता। à¤à¤²à¤¿à¤¸à¤¨ बà¥à¤¶ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° रीति कविता और ‘कोरà¥à¤Ÿ कलà¥à¤šà¤°â€™ या दरबारी परिवेश à¤à¤•-दूसरे पर आशà¥à¤°à¤¿à¤¤ थे। बृहतà¥à¤¤à¤° हिनà¥à¤¦à¥à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤¨ में फैली यह साहितà¥à¤¯à¤¿à¤• संसà¥à¤•ृति बहà¥à¤à¤¾à¤·à¥€ व समावेशी थी। इसलिठरीति कविता को जाने बिना à¤à¤¾à¤°à¤¤ के बहà¥à¤²à¤¤à¤¾à¤µà¤¾à¤¦à¥€ अतीत को समगà¥à¤°à¤¤à¤¾ में नहीं समà¤à¤¾ जा सकता। —दलपत राजपà¥à¤°à¥‹à¤¹à¤¿à¤¤, 'à¤à¥‚मिका' से ★★★ à¤à¤²à¤¿à¤¸à¤¨ बà¥à¤¶ ने रीति कविता को पà¥à¤¨à¤ƒà¤ªà¤°à¤¿à¤à¤¾à¤·à¤¿à¤¤ करते हà¥à¤ इसे खà¥à¤¦ कवियों और आशà¥à¤°à¤¯à¤¦à¤¾à¤¤à¤¾à¤“ं की दृषà¥à¤Ÿà¤¿ से देखा कि उनके लिठकà¥à¤¯à¤¾ महतà¥à¤¤à¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ था? वे किस बात को महतà¥à¤¤à¥à¤µ देते थे और कà¥à¤¯à¥‹à¤‚? इन सवालों ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ रीतिकावà¥à¤¯ के विशाल आरà¥à¤•ाइव को नये सिरे से देखने का अवसर दिया। हिनà¥à¤¦à¥€ कवि लगà¤à¤— चार शताबà¥à¤¦à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ तक इसी कावà¥à¤¯ संसार की रचना में लगे रहे थे जिससे यह आरà¥à¤•ाइव विशाल बनता गया। à¤à¤²à¤¿à¤¸à¤¨ बà¥à¤¶ ने रीति कवियों के उन शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚, विषयों, और छनà¥à¤¦à¥‹à¤‚ पर गहराई से काम किया, जिनसे यह कावà¥à¤¯ जीवनà¥à¤¤ हà¥à¤†à¥¤ अपनी इस पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• में वे कविता और इतिहास के अनà¥à¤¤à¤ƒ समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¥‹à¤‚ को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¥€ हैं। —फ़à¥à¤°à¤¾à¤‚चेसà¥à¤•ा ऑरà¥à¤¸à¥€à¤¨à¥€, अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¤¼à¥€ संसà¥à¤•रण की à¤à¥‚मिका से "