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Cover of Karmbhumi

Karmbhumi

(Hardback)

Munshi Premchand,

nayee kitab prakashan (Publisher)

Published
2016
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मश परमचद सरफ ‘कलम क मजदर’ य ‘कलम क सपह’ ह नह थ, व ‘कलम क जदगर’ भ थ । व अपन समय और समज क जगरक परहर थ । उनक कलम न अपन समज क लगभग हर तरह क समसय पर उगल रख और ऐस यथरथ चतरण कय क आज भ वह उस समय क भरतय गरमण एव बहर जवन क परमणक दसतवज ह । दनय भर क भषओ म उनक उपनयस, कहनय क अनवद हए ह । उनहन 18 उपनयस और लगभग तन स कहनय और सकड लख लख । व कलम स ह जत थ । उनहन हस पतरक क सथपन क । व परगतशल लखक सघ क ससथपक रह । गदन, करमभम, रगभम और कफन, पस क रत, सदगत, पच परमशवर, हर मत, ठकर क कआ आद अनक कथकतय वशव सहतय म उचच कट क सथन रखत ह । आज क समय म परमचद क कथओ क पढन एक–बर फर अपन अतत, वरतमन और भवषय क खजन ह । परमचद समरजयवद–समतवद जवन सथतय और मलय क वपकष म सकलर परगतशलत क मशल जलन वल रचनकर थ । उनक रचनए आज भ हम अतत क बत, वरतमन क सलझ भवषय क सकत दत ह । आज परमचद क कलम वकत क जररत ह । उनक सरल, सबध, चटल, वयगयतमक, मरमक भष सध दल म उतर जत ह । आप इनह खरद, पढ, दसर क भ पढए ।

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