मश परमचद सरफ ‘कलम क मजदर’ य ‘कलम क सपह’ ह नह थ, व ‘कलम क जदगर’ ठथ । व अपन समय और समज क जगरक परहर थ । उनक कलम न अपन समज क लगà¤à¤— हर तरह क समसय पर उगल रख और à¤à¤¸ यथरथ चतरण कय क आज ठवह उस समय क à¤à¤°à¤¤à¤¯ गरमण à¤à¤µ बहर जवन क परमणक दसतवज ह । दनय à¤à¤° क à¤à¤·à¤“ म उनक उपनयस, कहनय क अनवद हठह । उनहन 18 उपनयस और लगà¤à¤— तन स कहनय और सकड लख लख । व कलम स ह जत थ । उनहन हस पतरक क सथपन क । व परगतशल लखक सघ क ससथपक रह । गदन, करमà¤à¤®, रगà¤à¤® और कफन, पस क रत, सदगत, पच परमशवर, हर मत, ठकर क कआ आद अनक कथकतय वशव सहतय म उचच कट क सथन रखत ह । आज क समय म परमचद क कथओ क पढन à¤à¤•–बर फर अपन अतत, वरतमन और à¤à¤µà¤·à¤¯ क खजन ह । परमचद समरजयवद–समतवद जवन सथतय और मलय क वपकष म सकलर परगतशलत क मशल जलन वल रचनकर थ । उनक रचनठआज ठहम अतत क बत, वरतमन क सलठà¤à¤µà¤·à¤¯ क सकत दत ह । आज परमचद क कलम वकत क जररत ह । उनक सरल, सबध, चटल, वयगयतमक, मरमक à¤à¤· सध दल म उतर जत ह । आप इनह खरद, पढ, दसर क ठपढठ।