बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के सरà¥à¤µà¤¾à¤‚गीण विकास में कहानियों का महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ योगदान होता है। बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को उनके दादा-दादी, नाना-नानी बड़े चाव से कहानियाठसà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¥‡ हैं। बचà¥à¤šà¥‡ à¤à¥€ इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बड़े धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ से सà¥à¤¨à¤¤à¥‡ हैं। इन कहानियों के माधà¥à¤¯à¤® से वे बड़े ही सहज à¤à¤¾à¤µ से जीवन-मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को गà¥à¤°à¤¹à¤£ करते हैं। कहानी के पातà¥à¤°à¥‹à¤‚ से उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ मिलती है। इन कहानियों के दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ उनका सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ मनोरंजन à¤à¥€ होता है। माताओं ने à¤à¥€ कहानियों के माधà¥à¤¯à¤® से अपने बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में संसà¥à¤•ार à¤à¤°à¥‡ हैं। इतिहास इसका गवाह है। हिंदी साहितà¥à¤¯ में गदà¥à¤¯ को लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ बनाने में कहानी विधा का विशेष योगदान रहा है। 'अमृत मंजूषा' में उचà¥à¤š पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤• (मिडिल) सà¥à¤¤à¤° के छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ की रà¥à¤šà¤¿ का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखा गया है। यह पूरक पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• à¤à¤¾à¤·à¤¾ अधिगम के चारों कौशलों के विकास में à¤à¥€ सहायक सिदà¥à¤§ होगी। à¤à¤¾à¤·à¤¾ कौशल के विकास के साथ-साथ अचà¥à¤›à¥‡ साहितà¥à¤¯ से परिचित कराना à¤à¥€ शिकà¥à¤·à¤¾ का उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ होता है। इस पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• में शरतचंदà¥à¤° च‌टà¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¾à¤§à¥à¤¯à¤¾à¤¯ की चà¥à¤¨à¤¿à¤‚दा रचनाओं को कà¥à¤› परिवरà¥à¤¤à¤¨ के साथ संकलित किया गया है।