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(Paperback)
Gautam Rajrishi,
Unbound Script (Publisher)
Ships within 2-4 days

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कड़कती धूप-सा पिता । नरà¥à¤® छाà¤à¤µ-सी माà¤à¥¤ à¤à¤• सकà¥à¤šà¤¾à¤¯à¤¾-सा लड़का । à¤à¤• धक-सी गोरी लड़की । और à¤à¤• अजीब-सी पà¥à¤°à¥‡à¤® कहानी । à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ कहानी जिसमें पà¥à¤°à¥‡à¤® तो तरतीब से सिमटा हà¥à¤† है, लेकिन कहानी बेतरतीब-सी जाने कहाठसे कहाठतक फैली हà¥à¤ˆ है ! # पटना साइंस कॉलेज के केमिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€ लैब से लेकर देहरादून इंडियन मिलिटà¥à¤°à¥€ à¤à¤•ेडमी के चेटवà¥à¤¡ परेड-गà¥à¤°à¤¾à¤‰à¤‚ड तक । # बिहार के विधान-सà¤à¤¾ चà¥à¤¨à¤¾à¤µ से लेकर à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सेना के सरà¥à¤œà¤¿à¤•ल सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤• तक । # शाहरà¥à¤–़ ख़ान की 'दिल वाले दà¥à¤²à¥à¤¹à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ ले जाà¤à¤‚गे' से लेकर सलमान ख़ान की 'सà¥à¤²à¥à¤¤à¤¾à¤¨' तक। कहानी, जो अपनी तरतीब सी बेतरतीबी में 'हमने कलेजा रख दिया- चाकू-की-नोक-पर' से उठती है तो फिर 'à¤à¤¸à¥€-नज़र-से-देखा-उस- ज़ालिम ने चौक पर ही जाकर गिरती है।
