गया जहाठहिनà¥à¤¦à¥‚ धरà¥à¤® कि परमà¥à¤ªà¤°à¤¾à¤“ं / पà¥à¤°à¤¥à¤¾à¤“ं / रीतियों तथा विशेष रूप से पिंडदान के लिठपà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤¦ है, वहीठबोध गया तथागत बà¥à¤¦à¥à¤§ के समता तथा बंधà¥à¤¤à¤¾ से हमें परिचित करता है | पर कà¥à¤› और à¤à¥€ अनसà¥à¤²à¤à¥‡ पहलू हैं, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤¦ दलित कथाकार मोहनदास नैमिशराय ने वहीठजाकर, उसी परिवेश के जीवंत पातà¥à¤°à¥‹à¤‚ से रà¥-ब-रॠहोकर सà¥à¤²à¤à¤¾à¤¨à¥‡ का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किया है | à¤à¤• ऒर जरà¥à¤œà¤° होती हिनà¥à¤¦à¥‚ धरà¥à¤® कि परमà¥à¤ªà¤°à¤¾à¤à¤‚ दूसरी तरफ सामाजिक बदलाव कि बयार |