'दूर देश के निकट' किताब विदेश यातà¥à¤°à¤¾à¤“ं का à¤à¤• संकलन है। इन यातà¥à¤°à¤¾à¤“ं को संसà¥à¤®à¤°à¤£ की शैली में लिखने वाले पेशेवर लेखक नहीं हैं बलà¥à¤•ि यायावर हैं और इनकी यातà¥à¤°à¤¾à¤à¤‚ अनूठी और दिलचसà¥à¤ª हैं। कई बार आदमी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ को देखने और जानने के लिठसफर करता है मगर कà¤à¥€-कà¤à¥€ खà¥à¤¦ से मà¥à¤²à¤¾à¤•ात करने के लिठà¤à¥€ सफर करता है। सफर की यह à¤à¤• अंतहीन पà¥à¤¯à¤¾à¤¸ है जिसे किसी à¤à¥€ दायरे में ला पाना नामà¥à¤®à¤•िन सा है। इन यातà¥à¤°à¤¾à¤“ं में लेखक महज सैलानी नहीं हैं बलà¥à¤•ि à¤à¤• हिंदà¥à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤¨à¥€ मà¥à¤¸à¤¾à¤«à¤¿à¤° इनके साथ चलता हà¥à¤† दिखाई देता है। इस सफर से गà¥à¤œà¤°à¤¤à¥‡ हà¥à¤ किताब का पाठक à¤à¥€ जिंदगी और दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में सिमटे इन सारे रंगों से रूबरू होता है। यह किताब किसी à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के तजà¥à¤°à¥à¤¬à¥‡ का संकलन न होकर à¤à¤¸à¥‡ कई घà¥à¤®à¤•à¥à¤•ड़ों की डायरी के पनà¥à¤¨à¥‡ हैं जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने मन मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ को देखा है। ये वो लोग हैं जो हर दिन किसी सफर पर निकले रहते हैं और जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने जीने का à¤à¤• नया अंदाज़ $कायम किया है। दूर किसी देश का स$फर करने वाले इन मà¥à¤¸à¤¾à¤«à¤¿à¤°à¥‹à¤‚ ने विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ देशों की यातà¥à¤°à¤¾à¤“ं में वहां के इतिहास, समाज, कला और संसà¥à¤•ृति को बड़ी खूबसूरती और तहज़ीब के साथ पेश किया है। - डॉ. कृषà¥à¤£ कà¥à¤®à¤¾à¤° - डॉ. राजेश चौहान