
Devrani Jethani ki Kahani
(Paperback)
Pt. Gauri dutt, Pt. Gauridutt, Sahitya Sarowar Experts,
SAHITYA SAROWAR (Publisher)
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देवरानी जेठानी की कहानी हिनà¥à¤¦à¥€ का उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ है। इसके रचयिता हिनà¥à¤¦à¥€ व देवनागरी के महान सेवक पंडित गौरीदतà¥à¤¤ हैं। न केवल अपने पà¥à¤°à¤•ाशन वरà¥à¤· (1870), बलà¥à¤•ि अपनी निरà¥à¤®à¤¿à¤¤à¤¿ के लिहाज से à¤à¥€ पं॰ गौरीदतà¥à¤¤ की कृति 'देवरानी-जेठानी की कहानी' को हिनà¥à¤¦à¥€ का पहला उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ (डॉ. गोपाल राय के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°) होने का शà¥à¤°à¥‡à¤¯ जाता है। किंचित लड़खड़ाहट के बावजूद हिनà¥à¤¦à¥€ उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸-यातà¥à¤°à¤¾ का यह पहला कदम ही आशà¥à¤µà¤¸à¥à¤¤à¤¿ पैदा करता है। अनà¥à¤¤à¤°à¥à¤µà¤¸à¥à¤¤à¥ इतनी सामाजिक कि ततà¥à¤•ालीन पूरा समाज ही धà¥à¤µà¤¨à¤¿à¤¤ होता है, मसलन, बाल विवाह, विवाह में फिजूलखरà¥à¤šà¥€, सà¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की आà¤à¥‚षणपà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¤à¤¾, बंटवारा, वृदà¥à¤§à¥‹à¤‚, बहà¥à¤“ं की समसà¥à¤¯à¤¾, शिकà¥à¤·à¤¾, सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€-शिकà¥à¤·à¤¾, - अपनी अनगढ़ ईमानदारी में उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ कहीं à¤à¥€ चूकता नहीं। साथ ही 19वीं शताबà¥à¤¦à¥€ के मधà¥à¤¯à¤µà¤°à¥à¤—ीय बनिया समाज के जीवन का यथारà¥à¤¥ चितà¥à¤°à¤£ à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ किया गया है। लोकसà¥à¤µà¤° संपृकà¥à¤¤ à¤à¤¾à¤·à¤¾ इतनी जीवनà¥à¤¤ है कि आज के साहितà¥à¤¯à¤•ारों को à¤à¥€ दिशा-निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤¿à¤¤ करती है। दृषà¥à¤Ÿà¤¿ का यह हाल है कि इस उपनà¥à¤¯à¤¾à¤¸ के माधà¥à¤¯à¤® से हिनà¥à¤¦à¥€ पटà¥à¤Ÿà¥€ में नवजागरण की पहली आहट तक को सà¥à¤¨à¤¾ जा सकता है।
