à¤à¤°à¤¤à¤¯ à¤à¤¤ क अजब दसत à¤à¤°à¤¤ म हर समदय, जनजत और उप-समदय क अपन à¤à¤¤-परत ह। सदय स à¤à¤¤-परत क दनय à¤à¤°à¤¤à¤¯ क आकरषत करत रह ह। मन जत ह क कछ à¤à¤¤ जलशय क पस पठजत ह और व गपचप आत-जत रहगर पर नजर बनठरखत ह, त कछ गरमय क दपहर म खत म à¤à¤Ÿà¤•त रहत ह और रसत खठहठपरष क बहकत ह, त कछ à¤à¤¸ ठह ज अनय बरइय स हमर रकष करत ह। शकर क तलश म पस-पडस म à¤à¤Ÿà¤•त उततर à¤à¤°à¤¤ क चडल स लकर मछल पसद करन वल पशचम बगल क मछ à¤à¤¤ और तमलनड क à¤à¤¯à¤¨à¤• मन पई à¤à¤¤ तक— ऋकसनदर बनरज न जदवपर वशववदयलय स बगल सहतय म सनतक और सनतकततर क डगर पर क ह। उनक बगल म टरनर अडड, परबस दबर बश, छय शरर (बगल म à¤à¤¤-परत कहनय क सगरह), चलर पथर खरकट आद पसतक परकशत ह और वà¤à¤¨à¤¨ पतर-पतरकओ म लख छपत रहत ह। उनक प-à¤à¤š.ड. शध-परबध समय क सथ सहतय म à¤à¤¤-परत क सकरमण पर कदरत रह ह। वरतमन म वह बरदवन वशववदयलय म करयरत ह।