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Cover of Bhartiya Bhooton Ki Ajeeb Dastan - 1 & 2 By Riksunder Banerjee Combo

Bhartiya Bhooton Ki Ajeeb Dastan - 1 & 2 By Riksunder Banerjee Combo

(Paperback)

Riksundar Banerjee,

Unbound Script (Publisher)

Published
01-01-23
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भरतय भत क अजब दसत भरत म हर समदय, जनजत और उप-समदय क अपन भत-परत ह। सदय स भत-परत क दनय भरतय क आकरषत करत रह ह। मन जत ह क कछ भत जलशय क पस पए जत ह और व गपचप आत-जत रहगर पर नजर बनए रखत ह, त कछ गरमय क दपहर म खत म भटकत रहत ह और रसत खए हए परष क बहकत ह, त कछ ऐस भ ह ज अनय बरइय स हमर रकष करत ह। शकर क तलश म पस-पडस म भटकत उततर भरत क चडल स लकर मछल पसद करन वल पशचम बगल क मछ भत और तमलनड क भयनक मन पई भत तक— ऋकसनदर बनरज न जदवपर वशववदयलय स बगल सहतय म सनतक और सनतकततर क डगर पर क ह। उनक बगल म टरनर अडड, परबस दबर बश, छय शरर (बगल म भत-परत कहनय क सगरह), चलर पथर खरकट आद पसतक परकशत ह और वभनन पतर-पतरकओ म लख छपत रहत ह। उनक प-एच.ड. शध-परबध समय क सथ सहतय म भत-परत क सकरमण पर कदरत रह ह। वरतमन म वह बरदवन वशववदयलय म करयरत ह।
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