1. पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• में आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ का अवतरण (पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤µà¤¾à¤¯ के रूप में दिया है)। 2. सà¤à¥€ विदà¥à¤µà¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ का अकारादिकà¥à¤°à¤® में वरà¥à¤£à¤¨ किया है। 3. जैन विदà¥à¤µà¤¾à¤¨, यति à¤à¤µà¤‚ लेखकों का परिचय। 4. चिकितà¥à¤¸à¤¾ à¤à¤µà¤‚ गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥à¥‹à¤‚ के नाम दिये हैं। आचारà¥à¤¯ वैदà¥à¤¯ ताराचनà¥à¤¦ शरà¥à¤®à¤¾ पं. रामदतà¥à¤¤ जी शरà¥à¤®à¤¾ के सà¥à¤ªà¥à¤¤à¥à¤° à¤à¤µà¤‚ मूल निवासी विसाऊ जिला à¤à¥à¤¨à¥à¤à¥à¤¨ (राज.) ने अपना पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ समापà¥à¤¤ कर 1960 में जयपà¥à¤° आ गये। इनà¥à¤¹à¥‹à¤¨à¥‡ सà¥à¤µ. वैदà¥à¤¯ मà¥à¤°à¤¾à¤°à¤¿ मिशà¥à¤° à¤à¤µà¤‚ वैदà¥à¤¯ रामकृषà¥à¤£ शरà¥à¤®à¤¾ जी के सानिधà¥à¤¯ में करà¥à¤®à¤¾à¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ के साथ आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ करते हà¥à¤ 1967 में जगदमà¥à¤¬à¤¾ आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ कालेज से आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¾à¤šà¤¾à¤°à¥à¤¯ उतà¥à¤°à¥à¤¤à¥€à¤£ कर अधà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¨ आरमà¥à¤ किया। इसके बाद हरियाणा के आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ कालेज रोहतक में 1978 तक अधà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¨ कारà¥à¤¯ किया। 1980 में पटियाला पंजाबी विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ से à¤à¤®.डी. आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ की उपाधि पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर मूलचनà¥à¤¦ हासà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² में वरिषà¥à¤ अनà¥à¤¸à¤‚धान अधिकारी के रूप में नियà¥à¤•à¥à¤¤ होकर पं. हरिदतà¥à¤¤ शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€, वैदà¥à¤¯ मà¥à¤•à¥à¤¨à¥à¤¦à¥€ लाल दà¥à¤µà¤¿à¤µà¥‡à¤¦à¥€ à¤à¤µà¤‚ वैदà¥à¤¯ शिवकà¥à¤®à¤¾à¤° जी मिशà¥à¤° के निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤¨ में 1995 तक कारà¥à¤¯ किया। वहीं आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¥€à¤¯ पंचकरà¥à¤® विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ à¤à¤µà¤‚ पà¥à¤°à¤•ाशन कराया। मूलचनà¥à¤¦ में आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ विशà¥à¤µà¤•ोष के 35 खणà¥à¤¡ तैयार किये। इनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने अधà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¨ काल से वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ तक आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¾à¤šà¤¾à¤°à¥à¤¯ (बी.à¤.à¤à¤®.à¤à¤¸) के पाठà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤®à¤¾à¤¨à¥à¤¸à¤¾à¤° पदारà¥à¤¥ विजà¥à¤žà¤¾à¤¨, दà¥à¤°à¤µà¥à¤¯à¤—à¥à¤£ विजà¥à¤žà¤¾à¤¨, इतिहास व कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ शरीर, रचना शरीर, शलà¥à¤¯, शालकà¥à¤¯, अषà¥à¤Ÿà¤¾à¤‚गहृदय, संसà¥à¤•ृत विषयों पर सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤° पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤•ें लिखी à¤à¤µà¤‚ समसà¥à¤¤ 16 विषयों पर पोडशांग चिकितà¥à¤¸à¤¾ विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ चार à¤à¤¾à¤—ों में पà¥à¤°à¤•ाशित किया।