आसà¥à¤¥à¤¾ का दीप--सदगà¥à¤°à¥ की आंख में अजहूं चेत गंवार! नासमà¤! अब à¤à¥€ चेत! à¤à¤¸à¥‡ à¤à¥€ बहà¥à¤¤ देर हो गई। जितनी न होनी थी, à¤à¤¸à¥‡ à¤à¥€ उतनी देर हो गई। फिर à¤à¥€, सà¥à¤¬à¤¹ का à¤à¥‚ला सांठघर आ जाठतो à¤à¥‚ला नहीं। अजहूं चेत गंवार! अब à¤à¥€ जाग! अब à¤à¥€ होश को समà¥à¤¹à¤¾à¤²! ये पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥‡ पद à¤à¤• अपूरà¥à¤µ संत के हैं। डà¥à¤¬à¤•ी मारी तो बहà¥à¤¤ हीरे तà¥à¤® खोज पाओगे। पलटूदास के संबंध में बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जà¥à¤žà¤¾à¤¤ नहीं है। संत तो पकà¥à¤·à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ जैसे होते हैं। आकाश पर उड़ते जरूर हैं, लेकिन पद-चिहà¥à¤¨ नहीं छोड़ जाते। संतों के संबंध में बहà¥à¤¤ कà¥à¤› जà¥à¤žà¤¾à¤¤ नहीं है। संत का होना ही अजà¥à¤žà¤¾à¤¤ होना है। अनाम। संत का जीवन अंतर-जीवन है। बाहर के जीवन के तो परिणाम होते हैं इतिहास पर, इतिवृतà¥à¤¤ बनता है। घटनाà¤à¤‚ घटती हैं बाहर के जीवन की। à¤à¥€à¤¤à¤° के जीवन की तो कहीं कोई रेख à¤à¥€ नहीं पड़ती। à¤à¥€à¤¤à¤° के जीवन की तो समय की रेत पर कोई अंकन नहीं होता। à¤à¥€à¤¤à¤° का जीवन तो शाशà¥à¤µà¤¤, सनातन, समयातीत जीवन है। जो à¤à¥€à¤¤à¤° जीते हैं उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ तो वे ही पहचान पाà¤à¤‚गे जो à¤à¥€à¤¤à¤° जाà¤à¤‚गे। इसलिठसिकंदरों, हिटलरों, चंगीज और नादिरशाह, इनका तो पूरा इतिवृतà¥à¤¤ मिल जाà¤à¤—ा, इनका तो पूरा इतिहास मिल जाà¤à¤—ा। इनके à¤à¥€à¤¤à¤° का तो कोई जीवन होता नहीं, बाहर ही बाहर का जीवन होता है; सà¤à¥€ को दिखाई पड़ता है। ओशो.